कारण
- मंगल और राहु एक ही भाव तथा राशि में युति (सर्वाधिक प्रबल रूप)
- मंगल और राहु एक ही भाव में भिन्न राशियों में युति (अपेक्षाकृत अल्प प्रभावी)
- शास्त्रीय ग्रंथों में परस्पर दृष्टि (मंगल द्वारा राहु के भाव पर दृष्टि अथवा विपरीत) का भी उल्लेख मिलता है — ज्योतिषियों में इस पर विवाद है
- अग्नि राशियों (मेष, सिंह, धनु) तथा लग्न भाव में यह योग सर्वाधिक तीव्र होता है
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