ॐ गं गणपतये नमः में गणेश के बीजाक्षर गं के साथ उन्हें नमन किया जाता है। किसी भी नए कार्य, यात्रा या अनुष्ठान से पहले इसका जप होता है, क्योंकि गणेश की पूजा सदैव सबसे पहले की जाती है।
ॐ गं गणपतये नमः



गणेश के उपनिषद् गणपति अथर्वशीर्ष में बीजाक्षर गं बताया गया है। लगभग हर हिंदू अनुष्ठान में गणेश का सम्मान सबसे पहले किया जाता है।
हर नई शुरुआत से पहले की प्रार्थना
नई शुरुआत पर गणेश का आशीर्वाद माँगा जाता है
मार्ग के विघ्न दूर करने के लिए जप किया जाता है
गणेश से बुद्धि और सही निर्णय की प्रार्थना
हर पूजा की शुरुआत में जप होता है, ताकि आगे की सभी अर्पणाएँ स्वीकार हों
विद्यार्थी पढ़ाई से पहले और परिवार नए घर में प्रवेश से पहले इसका जप करते हैं
किसी भी शुरुआत से पहले; बुधवार और हर महीने की चतुर्थी तिथियों पर
108, या किसी एक कार्य से पहले 21
गणेश के चित्र के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
दूर्वा, लाल फूल या मोदक उपलब्ध हों तो अर्पित करें।
108 बार जप करें, या किसी एक कार्य से पहले 21 बार।
शुरू करने से पहले अपने शब्दों में उस कार्य का नाम लें।
प्रार्थना का भाव मन में रहते हुए शीघ्र ही कार्य शुरू करें।
परंपरा के अनुसार उत्तर, सरल शब्दों में।
पुराणों के अनुसार, शिव ने गणेश को अपने गणों का स्वामी और प्रथम पूज्य बनाया। हर अनुष्ठान, विवाह और नए कार्य की शुरुआत उनके नाम से होती है, ताकि वह निर्विघ्न आगे बढ़े।
हर पूर्णिमा के बाद की चौथी तिथि। भक्त चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं और गणेश के मंत्र से उनकी पूजा करते हैं। भाद्रपद (अगस्त–सितंबर) की गणेश चतुर्थी उनका प्रमुख पर्व है।
किसी भी शुरुआत से पहले ॐ गं गणपतये नमः का 21 या 108 बार जप करना प्रचलित है। विद्यार्थी अक्सर साथ में सरस्वती मंत्र भी जपते हैं।
अपना जन्म विवरण भरें और जानें कि परंपरा आपकी कुंडली के लिए कौन से ग्रह मंत्र बताती है, कितनी बार और कब जप करना है। बस एक निःशुल्क खाता चाहिए।