विवाह मुहूर्त के लिए पंचांग, तिथि, नक्षत्र और पारंपरिक नियमों का यह संदर्भ पढ़ें। बड़े निर्णयों के लिए अपनी जन्म कुंडली और स्थानीय समय भी ध्यान में रखें।
अमावस्या (नई चाँद की रात) +6 और
विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी) सम्पूर्ण भारत के लिए अत्यंत शुभ विवाह तिथि है



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तिथि तय करने से पहले वार, राहु काल और ऊपर लिखे अन्य नियम भी देख लें।
विवाह मुहूर्त हिन्दू विवाह संस्कार के लिए चुना गया शुभ समय है। विवाह 16 संस्कारों में से एक है और समृद्ध तथा सामंजस्यपूर्ण दाम्पत्य जीवन के लिए सही मुहूर्त का चयन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। प्रमुख कारकों में दम्पत्ति की जन्म-कुंडली, सप्ताह का दिन, चंद्र तिथि, नक्षत्र तथा अशुभ योगों का अभाव सम्मिलित हैं।
मार्गदर्शिका से सीधे, सरल शब्दों में।
विवाह मुहूर्त हिन्दू विवाह संस्कार के लिए चुना गया शुभ दिन और समय है। यह पंचांग (पाँच तत्व: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) तथा वर-वधू की जन्म कुंडली के विश्लेषण द्वारा निर्धारित किया जाता है।
रोहिणी नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष में विवाह के लिए सर्वाधिक शुभ माना जाता है। उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, मृगशिरा, स्वाति, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती भी शुभ माने जाते हैं।
मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर), माघ (जनवरी–फरवरी), फाल्गुन (फरवरी–मार्च), वैशाख (अप्रैल–मई) और ज्येष्ठ (मई–जून) उत्तर भारत में परंपरागत रूप से विवाह के लिए शुभ मास माने जाते हैं। दक्षिण भारतीय परंपराओं में भिन्नता हो सकती है।
नहीं। अमावस्या (नव चंद्रमा) का हिंदू विवाह में सख्ती से परिहार किया जाता है क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। अधिकांश परंपराओं के अनुसार एकादशी, चतुर्दशी और अष्टमी से भी बचना चाहिए।
ज्योतिषी आपकी कुंडली का पाठ करके, आपके शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार आपके कार्य के लिए सबसे शुभ समयावधि चुनते हैं।