कारण
- जन्म कुंडली में शनि और राहु की युति — किसी भी राशि में
- यह युति विशेष रूप से कन्या, तुला, मिथुन या कुंभ राशि में अत्यधिक तीव्र होती है (जहाँ शनि बलवान होता है और राहु उसे प्रबल करते हैं।)
- जब यह युति 1, 4, 7 या 10 भावों (केंद्र भावों) में होती है, तो प्रभाव सर्वाधिक स्पष्ट होते हैं
- कुछ परंपराएँ राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा) में शनि को भी इसका हल्का रूप मानती हैं
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