कारण
- शनि और चंद्रमा एक ही भाव और राशि में युति (सबसे प्रबल रूप)
- शनि और चंद्रमा एक ही भाव में, किंतु भिन्न राशियों में (मध्यम रूप)
- यह योग लग्न, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में होने पर अधिक तीव्र हो जाता है
- यह चंद्रमा के कृष्ण पक्ष में तथा शनि के बलवती राशि (मकर, कुंभ, तुला) में स्थित होने पर अधिक तीव्र होता है
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