यात्रा मुहूर्त (यात्रा मुहूर्त) के लिए पंचांग, तिथि, नक्षत्र और पारंपरिक नियमों का यह संदर्भ पढ़ें। बड़े निर्णयों के लिए अपनी जन्म कुंडली और स्थानीय समय भी ध्यान में रखें।
प्रस्थान दिवस पर राहु काल और यमगण्ड +4 और
दिशा का महत्व है: प्रत्येक वार को यात्रा की शुभ दिशा होती है (सोमवार = उत्तर; मंगलवार = दक्षिण — प्रायः वर्जित; बुधवार = उत्तर; गुरुवार = उत्तर/ईशान; शुक्रवार = पश्चिम; शनिवार = पश्चिम/वायव्य; रविवार = पूर्व)



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तिथि तय करने से पहले वार, राहु काल और ऊपर लिखे अन्य नियम भी देख लें।
यात्रा मुहूर्त किसी महत्वपूर्ण यात्रा अथवा प्रवास के आरंभ हेतु चयनित शुभ समय है — तीर्थयात्रा, दीर्घ-दूरी प्रवास, स्थानांतरण, अथवा किसी नवीन अध्याय के एक भिन्न स्थान पर शुभारंभ। प्रस्थान के लिए शुभ समय का चयन करने की परंपरा गृहस्थ धर्म ग्रंथों तथा मुहूर्त पर शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथों दोनों में निहित है।
मार्गदर्शिका से सीधे, सरल शब्दों में।
यात्रा मुहूर्त वैदिक परंपरा में यात्रा आरंभ करने का शुभ समय है। इसमें सप्ताह के दिन, चंद्र तिथि, नक्षत्र और प्रस्थान के समय की जाँच की जाती है ताकि यात्रा अनुकूल ग्रह प्रभावों के अंतर्गत सुरक्षित और सफल परिणाम के लिए आरंभ हो।
मंगलवार (मंगलवार) को कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में मंगल से जुड़ी दुर्घटनाओं और संघर्ष के कारण यात्रा आरंभ करने के लिए कम शुभ माना जाता है। शनिवार (शनिवार) की यात्रा भी पारंपरिक रूप से सतर्कता से देखी जाती है। किसी भी दिन राहु काल में प्रस्थान से सख्ती से बचना चाहिए।
नियोजित प्रस्थान दिवस के लिए पंचांग देखें: सुनिश्चित करें कि नक्षत्र यात्रा के लिए शुभ हो (अश्विनी, पुष्य, हस्ता, अनुराधा, रेवती), तिथि अमावस्या, चतुर्दशी या अष्टमी न हो, तथा प्रस्थान का समय राहु काल या यमगंड में न हो। गहन विश्लेषण हेतु वैदिक ज्योतिषी प्रस्थान समय की कुंडली देख सकते हैं।
ज्योतिषी आपकी कुंडली का पाठ करके, आपके शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार आपके कार्य के लिए सबसे शुभ समयावधि चुनते हैं।