कारण
- एक ही भाव में सूर्य का राहु के साथ युति होना (सौर ग्रहण दोष — राहु द्वारा सूर्य का ग्रहण)
- एक ही भाव में सूर्य का केतु के साथ युति होना (सौर ग्रहण दोष — केतु द्वारा सूर्य का आच्छादन)
- एक ही भाव में चंद्रमा का राहु के साथ युति होना (चंद्र ग्रहण दोष — राहु द्वारा चंद्रमा का ग्रहण)
- एक ही भाव में चंद्रमा का केतु के साथ युति होना (चंद्र ग्रहण दोष — केतु द्वारा चंद्रमा का आच्छादन)
- जब जन्म कुंडली में राहु या केतु की यथार्थ अंश के निकट ग्रहण हो तो यह दोष अधिक प्रबल हो जाता है
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