Healers Worldसहस्रार, हज़ार दलों वाला कमल, सिर के ऊपर और छहों केंद्रों से परे स्थित है। यहाँ प्रत्येक कमल से पार होकर ऊपर आई कुण्डलिनी शक्ति शिव से मिलती है।
बीज मंत्रमौन



सहस्रार सूक्ष्म-शरीर परंपराओं से जुड़ी एक सांस्कृतिक सूची शब्दावली है।
| शब्द | सहस्रार · मुकुट चक्र |
|---|---|
| संदर्भ | सूक्ष्म-शरीर परंपराएँ |
ग्रंथों में हज़ार दलों वाले, नीचे की ओर मुख किए कमल का वर्णन है, जो पूर्णिमा के चंद्रमा से भी अधिक प्रकाशमान है। यह परमशिव का निवास है, और यहाँ शिव और शक्ति का मिलन पूरी साधना का लक्ष्य है।
सहस्रार तत्त्वों और इंद्रियों से परे है। परंपरा इसे मिलन का स्थान मानती है, जहाँ व्यक्ति और परमात्मा दो नहीं रहते।
शिव और शक्ति का मिलन
विचार से परे स्थिरता
अंतर्मुखी यात्रा का अंत
कृपा, जो ली नहीं जाती, पाई जाती है
दिन में एक या दो बार कुछ मिनट शांति में बिताएँ। साधना को धीरे और सहज रूप से करें, और गहराई की ओर बढ़ने पर अपनी परंपरा के किसी गुरु से मार्गदर्शन लें।
सीधे बैठें और पूरे शरीर को स्थिर होने दें।
अपना ध्यान सिर के शिखर पर हल्के से टिकाएँ।
जप को मौन में विलीन होने दें।
उठने से पूर्व यह अभ्यास अपने देवता को अर्पित करें।
इसका अर्थ, इसका बीज मंत्र और इसकी अभ्यास-विधि।
सहस्रार, अर्थात हज़ार दलों वाला, सिर के ऊपर स्थित सातवाँ चक्र है। परंपरा के अनुसार शिव और शक्ति का मिलन यहीं होता है।
शास्त्रीय ग्रंथ में इसे न किसी तत्त्व के साथ जोड़ा गया है और न उसका कोई अपना बीज बताया गया है। इसे ध्वनि से परे, केवल मौन में ही प्राप्त किया जाता है।
हज़ार असीम का प्रतीक है। कहा जाता है कि वर्णमाला के सभी अक्षर इसके दलों पर अनेक बार अंकित हैं, इसलिए हर ध्वनि यहाँ एकत्र है।

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चक्र-अभ्यास ध्यान और भक्ति का मार्ग है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए कृपया चिकित्सक से परामर्श करें।