Healers Worldस्वाधिष्ठान, अर्थात अपना ही निवास, दूसरा कमल है, जो मूलाधार के ठीक ऊपर स्थित है। यह जल तत्व, भावना, स्वाद और जीवन की रचनात्मक धारा का स्थान है।
बीज मंत्रवं



स्वाधिष्ठान सूक्ष्म-शरीर परंपराओं से जुड़ी एक सांस्कृतिक सूची शब्दावली है।
| शब्द | स्वाधिष्ठान · त्रिक चक्र |
|---|---|
| संदर्भ | सूक्ष्म-शरीर परंपराएँ |
ग्रंथों में छह दलों वाले सिंदूरी कमल का वर्णन है। इसके भीतर जल का श्वेत अर्धचंद्र चमकता है और वं बीज मकर पर विराजमान है। यहाँ शक्ति राकिनी के साथ विष्णु अधिष्ठित हैं।
स्वाधिष्ठान में जल तत्त्व और स्वाद-इंद्रिय का वास है। परंपरा इसे भावना, आनंद और सृजन से, जीवन की बहती धाराओं से जोड़ती है।
जलवेग से बहती भावनाएँ
सृजन और आनंद
परिवर्तन में सहजता
संबंधों में स्नेह
दिन में एक या दो बार कुछ मिनट शांति में बिताएँ। साधना को धीरे और सहज रूप से करें, और गहराई की ओर बढ़ने पर अपनी परंपरा के किसी गुरु से मार्गदर्शन लें।
सीधे बैठें और दोनों हाथ घुटनों पर रखें, एक हाथ दूसरे के ऊपर।
अपना ध्यान नाभि के ठीक नीचे रखें।
वं का जप ऐसी कोमलता से करें, जैसे जल बह रहा हो।
स्थिर जलतल पर श्वेत अर्धचंद्र का मन में चित्र बनाएँ।
इसका अर्थ, इसका बीज मंत्र और इसकी अभ्यास-विधि।
स्वाधिष्ठान, यानी अपना ही निवास, मूलाधार के ठीक ऊपर स्थित दूसरा चक्र है। इसका संबंध जल तत्व और स्वाद-बोध से है।
इसका बीजाक्षर वं है, जो जल का बीज मंत्र है।
षट्चक्र निरूपण में इसके देवता विष्णु बताए गए हैं, उनके साथ शक्ति राकिनी हैं, और इसके बीज का वाहन मकर है।

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