Healers Worldअनाहत, अर्थात ‘बिना आघात का’, हृदय में स्थित चौथा कमल है। इसका नाम उस ध्वनि से है जो बिना किसी आघात के स्वयं गूँजती है, वह शब्द जिसे ऋषि भीतर सुनते हैं।
बीज मंत्रयं



अनाहत सूक्ष्म-शरीर परंपराओं से जुड़ी एक सांस्कृतिक सूची शब्दावली है।
| शब्द | अनाहत · हृदय चक्र |
|---|---|
| संदर्भ | सूक्ष्म-शरीर परंपराएँ |
ग्रंथों में बारह दलों वाले कमल का वर्णन है, जो बंधूक पुष्प के समान लाल है। उसके भीतर वायु तत्त्व का षट्कोण है और यं बीज काले मृग पर विराजमान है। यहाँ शक्ति काकिनी के साथ ईश अधिष्ठित हैं, और बाण लिंग सोने की भाँति चमकता है।
अनाहत में वायु तत्त्व और स्पर्श-इंद्रिय का वास है। परंपरा इसे जीवात्मा का, प्रेम और भक्ति का स्थान मानती है, जहाँ निचले और ऊपरी केंद्र मिलते हैं।
प्रेम और समर्पण, भक्ति
सभी प्राणियों पर करुणा
भीतर का अनाहत नाद
निचले और ऊपरी केंद्रों का संगम
दिन में एक या दो बार कुछ मिनट शांति में बिताएँ। साधना को धीरे और सहज रूप से करें, और गहराई की ओर बढ़ने पर अपनी परंपरा के किसी गुरु से मार्गदर्शन लें।
सीधे बैठें, छाती खुली रखें और कंधे शिथिल करें।
अपना ध्यान वक्ष के मध्य में स्थिर करें।
यं का शांत स्वर में जप करें और साँस के प्रवाह को फैलने दें।
हृदय में एक छोटी, स्थिर लौ का चित्र बनाएँ और उसे अपने देवता को अर्पित करें।
इसका अर्थ, इसका बीज मंत्र और इसकी अभ्यास-विधि।
अनाहत, अर्थात ‘बिना आघात का’, हृदय में स्थित चौथा चक्र है। इसमें वायु तत्त्व और स्पर्श-इंद्रिय का वास है; परंपरा इसे भक्ति का स्थान मानती है।
इसका बीजाक्षर यं है, जो वायु का बीज है।
अनाहत का अर्थ है ‘जिस पर आघात न हुआ हो’। इसका नाम अनाहत नाद से है, वह भीतरी ध्वनि जो दो वस्तुओं के टकराए बिना सुनाई देती है।

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चक्र-अभ्यास ध्यान और भक्ति का मार्ग है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए कृपया चिकित्सक से परामर्श करें।