ज्ञान का शब्दकोश
ज्योतिष को समझकर पढ़ें
लग्न, नक्षत्र, महादशा और पंचांग — हर शब्द का अर्थ, उसका संदर्भ और आपकी कुंडली में उसका उपयोग।
सरल भाषा और उदाहरणों के साथ शब्दावली।
लग्न (Lagna)
जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उभरने वाली राशि; इसे उदय राशि भी कहते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषजन्म राशि (Janma Rashi)
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, वही आपकी जन्म राशि है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषनक्षत्र (Nakshatra)
आकाश-पथ के 27 चंद्र-खंड, जिनसे जन्म और समय-संबंधी ज्योतिषीय गणना की जाती है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषमहादशा (Mahadasha)
विंशोत्तरी दशा में किसी ग्रह का मुख्य काल, जो जीवन के एक बड़े चरण को दर्शाता है।
पूरी परिभाषा →पंचांगपंचांग (Panchang)
दिन के पाँच अंगों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—का वैदिक दैनिक कैलेंडर।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषनवांश (Navamsa)
नौवाँ विभाजन-चक्र (D9), जिसका उपयोग ग्रहों की गहरी शक्ति और वैवाहिक संकेत पढ़ने में होता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषआत्मकारक (Atmakaraka)
जन्म-कुंडली में सबसे अधिक अंश वाला ग्रह, जिसे जैमिनी पद्धति में आत्म-संकेतक माना जाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषअंतर्दशा (Antardasha)
महादशा के भीतर चलने वाला छोटा ग्रह-काल, जो उस बड़े काल के अनुभवों को सूक्ष्म बनाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषकुंडली (Kundli)
जन्म के समय और स्थान पर आकाश में ग्रहों की स्थिति दिखाने वाला वैदिक जन्म-चक्र।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषसाढ़े साती (Sade Sati)
जन्म राशि के आसपास शनि के लगभग साढ़े सात वर्ष के गोचर को कहा जाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषगोचर (Transit)
वर्तमान आकाश में ग्रहों की राशि-यात्रा, जिसे जन्म-कुंडली के संदर्भ में पढ़ा जाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषयोग (Yoga)
योग (ज्योतिष)
कुंडली में ग्रहों का ऐसा संबंध या विन्यास, जो किसी विशेष जीवन-विषय का संकेत दे सकता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषअष्टकवर्ग (Ashtakavarga)
ग्रहों और भावों की ताकत को बिंदुओं के माध्यम से आँकने वाली वैदिक गणना-पद्धति।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषदशा (Vimshottari Dasha)
चंद्र नक्षत्र से जुड़ी ग्रह-काल व्यवस्था, जिसमें नौ ग्रह क्रम से जीवन के अलग चरणों का संकेत देते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषअस्तंगत / मौड्यमी (Combustion)
सूर्य के बहुत पास आने पर ग्रह की अभिव्यक्ति कमजोर मानी जाने वाली स्थिति।
पूरी परिभाषा →पंचांगतिथि (Tithi)
सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 डिग्री के अंतर से मापी जाने वाली चंद्र-दिन की इकाई।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषकारक (Karaka)
जीवन के किसी क्षेत्र का स्वाभाविक संकेतक ग्रह, जैसे सूर्य का आत्मविश्वास और पिता से संबंध।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषयोगकारक (Yogakaraka)
किसी लग्न के लिए त्रिकोण और केंद्र भावों का स्वामी बनने वाला विशेष लाभकारी ग्रह।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषविंशोत्तरी दशा (Vimshottari Dasha)
120 वर्ष का ग्रह-काल चक्र, जो जन्म नक्षत्र के आधार पर वैदिक समय-निर्धारण में उपयोग होता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषउपचय (Upachaya)
तीसरा, छठा, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव—जहाँ समय और प्रयास से विकास के संकेत पढ़े जाते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषभाव (Bhava)
कुंडली का जीवन-क्षेत्र; बारह भाव शरीर, परिवार, काम, संबंध और अन्य विषयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषवर्गोत्तम (Vargottama)
जब कोई ग्रह जन्म-चक्र और नवांश, दोनों में उसी राशि में हो।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषषड्बल (Shadbala)
ग्रह की कुल शक्ति को छह अलग आधारों से मापने वाली वैदिक गणना।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषदिग् बल (Dig Bala)
दिशात्मक शक्ति; कुछ भावों में स्थित होने पर ग्रह को विशेष बल मिलने की गणना।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषबाधक (Badhaka)
लग्न के प्रकार के अनुसार तय होने वाला भाव-स्वामी, जिसे कुछ परंपराएँ रुकावटों के संकेत के रूप में पढ़ती हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषराहु–केतु अक्ष (Rahu–Ketu Axis)
चंद्रमा के दो नोड, जो हमेशा आमने-सामने रहते हैं और कुंडली में एक धुरी बनाते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषअस्त (Planetary Combustion)
सूर्य के निकट होने से ग्रह की रोशनी छिपी हुई मानी जाने वाली अवस्था।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषपरिवर्तन योग (Parivartana Yoga)
दो ग्रहों का एक-दूसरे की राशियों में होना, जिससे उनके भावों का संबंध बनता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषग्रह दृष्टि (Graha Drishti)
ग्रह की भावों पर पड़ने वाली ज्योतिषीय दृष्टि; मंगल, गुरु और शनि की विशेष दृष्टियाँ भी मानी जाती हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषहोरा चक्र (Hora Chart)
द्वितीय विभाजन-चक्र (D2), जिसका उपयोग धन और भौतिक संसाधनों के संकेत देखने में किया जाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषउच्च (Exaltation)
जब ग्रह अपनी उच्च राशि में हो और उसके संकेतों को प्रकट करने की क्षमता बढ़ी हुई मानी जाए।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषनीच (Debilitation)
जब ग्रह अपनी नीच राशि में हो; यह स्थिति ग्रह के संकेतों के लिए अतिरिक्त चुनौती का संकेत दे सकती है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषवक्री (Retrograde)
पृथ्वी से देखने पर ग्रह का पीछे चलता हुआ दिखाई देना; वैदिक फलित में इसे विशेष गति-संकेत माना जाता है।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषकेंद्र भाव (Kendra Houses)
केन्द्र
पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव—कुंडली के चार मुख्य कोण।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषत्रिकोण भाव (Trikona Houses)
पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव—धर्म, प्रतिभा, सीख और सौभाग्य से जुड़े त्रिकोण।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषयुति (Conjunction)
दो या अधिक ग्रहों का एक ही भाव या राशि में होना, जिससे उनके संकेत साथ पढ़े जाते हैं।
पूरी परिभाषा →वैदिक ज्योतिषदुःस्थान भाव (Dusthana Houses)
छठा, आठवाँ और बारहवाँ भाव—चुनौती, परिवर्तन, सेवा और छोड़ने के विषयों से जुड़े क्षेत्र।
पूरी परिभाषा →इन शब्दों को अपनी कुंडली में देखें
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