ॐ नमः शिवाय, पंचाक्षरी या पाँच अक्षरों वाला मंत्र, का अर्थ है “मैं शिव को नमन करता हूँ।” यह सबसे अधिक जपा जाने वाला शिव मंत्र है। दैनिक भक्ति में सभी इसका जप करते हैं।
ॐ नमः शिवाय



इसके शब्द यजुर्वेद के श्री रुद्रम में आते हैं: नमः शिवाय च शिवतराय च। तमिल शैव संतों ने पाँच अक्षरों, न-मः-शि-वा-य, को अपनी उपासना का सार मानकर गाया।
दैनिक भक्ति में शिव को नमन
कल्याणकारी शिव के आगे स्वयं को नमन कराता है
मन को शांत करके भीतर की ओर मोड़ने के लिए जपा जाता है
इसके पाँच अक्षर पृथ्वी से आकाश तक पाँच तत्वों से जुड़े हैं
हर भक्त के लिए सहज दैनिक साधना
शिवरात्रि के रात्रि जागरण में इसका जप चलता रहता है
किसी भी समय; सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि शिव को समर्पित हैं।
रुद्राक्ष की माला पर 108 जप, या निरंतर मौन प्रार्थना के रूप में
उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठें। सामने शिव का चित्र या शिवलिंग रखें।
जल, बिल्वपत्र या फूल उपलब्ध हो तो चढ़ाएँ।
पाँचों अक्षरों की लय समान रखते हुए सस्वर, धीमे स्वर में या मन ही मन जप करें।
108 मनकों की रुद्राक्ष माला से जप करें। मेरु मनके पर पहुँचकर माला पलट लें।
अंत में मौन रहें और मंत्र की ध्वनि को भीतर ठहरने दें।
परंपरा के अनुसार उत्तर, सरल शब्दों में।
“ॐ, मैं शिव को नमन करता हूँ।” नमः स्वयं को झुकाना है; शिव का अर्थ है कल्याणकारी, दयालु। शैव आचार्य पाँचों अक्षरों में समस्त सृष्टि को शिव को अर्पित करने का भाव देखते हैं।
सरल भक्ति भाव से जप के लिए नहीं; घरों और मंदिरों में सभी इसका जप करते हैं। शैव सिद्धांत परंपरा में गुरु इसे विधिवत दीक्षा में देते हैं। व्रत के रूप में इसे अपनाने वाले प्रायः यह आशीर्वाद लेते हैं।
क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि माघ या फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात आती है (फ़रवरी–मार्च)। भक्त उपवास और जागरण करते हैं। रात के चारों प्रहर शिवलिंग का अभिषेक करते हुए ॐ नमः शिवाय जपते हैं।
अपना जन्म विवरण भरें और जानें कि परंपरा आपकी कुंडली के लिए कौन से ग्रह मंत्र बताती है, कितनी बार और कब जप करना है। बस एक निःशुल्क खाता चाहिए।