आपकी साधना के लिए व्रत और उपवास का क्या अर्थ है?
व्रत एक भक्तिपूर्ण संकल्प है, जिसमें प्रार्थना, आत्म-अनुशासन और उपवास जैसा अनुष्ठान एक साथ समाहित होते हैं। इसकी समय-सीमा निश्चित ग्रेगोरियन तिथि के बजाय चंद्र तिथि तथा गृहपरंपरा या संप्रदाय की परंपरा के अनुसार होती है। नीचे दिए गए अनुष्ठानों में से एक चुनकर उसकी कथा, पूजा और समापन परंपरा को समझें, और अपने स्वास्थ्य व क्षमता को प्राथमिकता दें।
आप किस व्रत का पालन करेंगे?
एकादशी व्रत
पूरे वर्ष, प्रतिमाह दो बार · पुनरावर्ती / पाक्षिक
प्रदोष व्रत
पूरे वर्ष, प्रतिमाह दो बार · पुनरावर्ती / पाक्षिक
संकष्टी चतुर्थी
पूरे वर्ष, प्रतिमाह एक बार · पुनरावर्ती / मासिक
वट सावित्री व्रत
मई–जून · वार्षिक
हरतालिका तीज
अगस्त–सितम्बर · वार्षिक
सोलह सोमवार व्रत
सोलह सप्ताह की अवधि, जो प्रायः श्रावण (जुलाई–अगस्त) से आरम्भ की जाती है · पुनरावर्ती / विस्तारित
सावन सोमवार
जुलाई–अगस्त · पुनरावर्ती / ऋतुजन्य
अहोई अष्टमी
अक्टूबर–नवम्बर · वार्षिक
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